बढ़ापुर। नगर के एक मुहल्ला निवासी एक गरीब व लाचार अधेड़ व्यक्ति की मधुमक्खियों के हमले के बाद उपचार न मिलने से तड़प-तड़प कर मौत हो गई। हालांकि इस मौत के लिए मधुमक्खियों के अलावा समाज में मर चुकी इंसानियत और अज्ञानता भी जिम्मेदार है।
नगर के मुहल्ला नौमी निवासी धर्मपाल सिंह कश्यप ( 58 वर्ष ) पुत्र स्वर्गीय राम सिंह की मधुमक्खियां के हमले के बाद उपचार न मिलने पर तड़प-तड़प कर मौत हो गई। बताया जाता है कि धर्मपाल सिंह गरीब व्यक्ति था जो किसानों के खेतों पर फसलों की रखवाली का काम करता था। इस काम से उसे जो चन्द रुपए मिलते थे उसी से उसके घर का चूल्हा जलता था।बताया जाता है कि 2 दिन पूर्व मंगलवार को मौजा विजयसिंहपुर में एक किसान के खेत पर उड़द की फसल की रखवाली करते समय मधुमक्खियों ने हमला कर धर्मपाल सिंह को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। गंभीर अवस्था में कुछ खेतों पर काम करने वाले मजदूरों ने उसे उसके घर तक पहुंचा था। जहां दो दिन तक उपचार के अभाव में वह घर के भीतर पड़ा हुआ तड़पता रहा परंतु किसी को भी उसकी चीख सुनाई नहीं दी और आज सवेरे उसकी मौत हो गई।धर्मपाल सिंह की मौत हो जाने के बाद उसके घर के बाहर जमा लोग यह कहते सुने गए की धर्मपाल सिंह बहुत अच्छा व्यक्ति था। परंतु यहां एक सवाल बनता है कि धर्मपाल तो अच्छा व्यक्ति था फिर उस मुहल्ले का समाज कैसा था जिसकी बेरुखी के चलते उसकी उपचार के अभाव में मौत हो गई ?
उपचार के अभाव और समाज की बेरुखी की बात सिर्फ धर्मपाल की मौत पर ही समाप्त नहीं हो जाती है। जिस तरह घर के भीतर उपचार के अभाव में तड़प-तड़प कर धर्मपाल की मौत हुई है उससे भी बुरी हालत में धर्मपाल की पत्नी
पत्नी बसंती देवी बीते ढाई माह से गरीबी के अलावा समाज की बेरुखी और मुर्दा हो चुकी इंसानियत के चलते जिंदगी और मौत से जंग लड़ रही है।
बताया जाता है कि ढाई माह पूर्व घर के भीतर गिर जाने के कारण बसंती देवी का कुल्हा टूट गया था। गरीब धर्मपाल के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह पत्नी का उपचार करा सके, तभी से उसकी पत्नी घर के भीतर बिस्तर पर पड़ी हुई दर्द से तड़प-तड़प कर जिंदगी और मौत से हर दिन जंग लड़ रही है। मुहल्ले के लोग बताते हैं कि पति धर्मपाल ही उसकी देखभाल कर रहा था अब उसकी मौत के बाद बसंती का क्या होगा ?
धर्मपाल की मौत के लिए मधुमक्खियों के अलावा मर चुकी इंसानियत भी जिम्मेदार
बताया जाता है कि धर्मपाल सिंह के परिवार में पत्नी और उसकी दो संतान थी बेटी का उसने विवाह कर दिया था बेटा दीपक 17 वर्ष अभी नाबालिग है जो मेहनत मजदूरी करके घर चलाने में पिता का हाथ बटा देता था। नाबालिग दीपक इस बात से अज्ञान था कि बीमार मां-बाप को आपातकालीन सेवा पर कॉल कर उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है। इस अज्ञानता के अलावा धर्मपाल की मौत और घर में तड़प रही बसंती देवी की हालात के लिए समाज की बेरुखी और मर चुकी इंसानियत भी पूरी तरह जिम्मेदार है।








